शिवलिंग पर तीन रेखाओं का यही महत्व है कि पूरी सृष्टि शून्य से उत्पन्न होती है और शून्य में ही विलीन हो जाती है। वैज्ञानिक रूप से भी यह बात समझ में आती है क्योंकि शून्य ही उस अनंत असीमित को समा सकता है। कोई भी आकार वाली चीज, असीमित को नहीं समा पाएगी। इसलिए शिव यानी शून्य, शिव यानी आदि, शिव यानी वह परम तत्त्व जिससे सब कुछ है पर वह स्वयं में कुछ भी नहीं, यह निराकार है, संसार में ऊर्जा का स्रोत है, जो कुछ भी जड़ और चेतन हमें दृष्टिगोचर होता है वह इसी शिव की अभिव्यक्ति है।
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