आभामंडल की ऊर्जा का संबंध मनुष्य के कर्मों से होता है। सकारात्मक वातावरण, सत्संग, हवन, मंत्र उच्चारण, ध्यान, भजन और धार्मिक स्थानों के सानिध्य में मनुष्य का आभामंडल विस्तृत होता है। इसके विपरीत नकारात्मक संग, भोजन, संगीत, साहित्य पढ़ना आदि आभामंडल को घटाता है। इसलिए यह विशेष ध्यान देना चाहिए कि हम अपना समय कैसे सानिध्य अथवा संग में व्यतीत करते हैं। हम कैसे लोगों के संबंध में अधिक रहते हैं।
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