Wednesday, 2 June 2021

वंचना के घेरे में

हमारे पितृसत्तात्मक समाज का ढांचा ही ऐसा बुना हुआ है कि स्त्री को अधिकतर मामलों में फैसले लेने का हक नहीं है। फिर चाहे वह देह से जुड़ा हो या जायदाद से। जब कोई स्त्री गर्भधारण करती है या अंतरंग संबंध बनाती है तो वह अपने शरीर की उपयुक्तता के बारे में नहीं सोचती। बल्कि परिवार, समाज की परंपरा और पति की इच्छा का ध्यान रखती है।

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