देश महामारी की दूसरी लहर की मार झेल रहा है। ज्यादातर राज्यों में हालात अभी भी बेकाबू हैं। सबने अपने-अपने हिसाब से पूर्णबंदी कर रखी है। जून में भी हालात सामान्य होने लगेंगे, इसके कोई आसार नजर नहीं आ रहे। ऐसे में परीक्षाएं कैसे हो पातीं? कौन जोखिम मोल लेता? जहां पहली प्राथमिकता जान बचाने की हो, वहां परीक्षा के बारे में कैसे कोई सोचे, यह बड़ा सवाल है।
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