समय का संदर्भ बदलते ही उन विचारों पर भी बदलने का दबाव बढ़ जाता है, जो नए हालात की ठीक से व्याख्या नहीं करते या उससे आगे देखने का जोखिम नहीं लेते। इस लिहाज से कोरोनाकाल में जो लेखक-विचारक सर्वाधिक चर्चा में रहे, उनमें युवाल नोवा हरारी का नाम अव्वल है।
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