Monday, 3 August 2020

राजनीति: निजीकरण नहीं है मर्ज की दवा

यह सवाल का उठना लाजिमी है कि अगर निजी बैंक कुशल हैं तो क्यों डूब गए या फिर क्यों सरकारी बैंकों में उनका विलय कर दिया गया? सवाल यह भी है कि अधिकांश उद्योगपति क्यों सरकारी बैंकों से कर्ज लेना पसंद करते हैं? क्यों निजी बैंक, ढांचागत परियोजनाओं को कर्ज देने से क्यों गुरेज करते हैं और ऐसा करने के लिए सरकारी बैंकों पर क्यों दबाव डाला जाता है?

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