Saturday, 25 July 2020

शख्सियत: स्मृति और आधुनिकता के साझे का चितेरा तैयब मेहता

तैयब मेहता के कला जीवन की शुरुआत काफी दिलचस्प रही। उन्होंने सबसे पहले फिल्मी दुनिया में अपनी किस्मत आजमाई। पर यह दुनिया न उन्हें ज्यादा रास आई और न ही उन्हें अपने कलात्मक तजुर्बे के लिए कोई खास मौके ही मिले। वहां से कुछ बनता न देख 1952 में उन्होंने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से उन्होंने डिप्लोमा किया। कला की शिक्षा के लिए तैयब पांच साल लंदन में रहे। उन्होंने अमेरिका का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम के कला संस्कारों को नज़दीक से समझने की कोशिश की।

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