गरीब की भूख और अमीर की थाली के बीच की दूरी को वे नैतिक और व्यावहारिक दोनों ही स्तरों पर शिद्दत से खारिज करते रहे। रचनात्मकता के साथ लोकप्रियता और कामयाबी का साझा रचने वाले ख्वाजा अहमद अब्बास ने सिनेमा से लेकर पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र को जिस तरह समृद्ध किया, वो बेमिसाल है।
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