वक्त ने हमें सुनहरा मौका दिया है सुधरने का, तो अपना जीवन संपादित किया जाए, ताकि अच्छे परिणाम जारी रहें। सुधार का यह अवसर दरअसल स्वानुशासन की तरफ खुली खिड़की है, जहां से बदली हुई प्रकृति की स्वास्थ्यवर्धक रोशनी आ रही है। कुदरत ने मानव जीवन में अपने परिवार सहित फिर से प्रभावी प्रवेश किया है। वे हमें खबरदार कर रही हैं कि इंसान ने कुदरत को मात्र एक वस्तु बना डाला था, असली मायनों में तो वही हमारी जीवनदायिनी है।
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