तितली पर बहुत-सी चीजें लिखी गई हैं। कविताएं और गीत भी बहुतेरे हैं। ‘पंछी बनूं उड़ती फिरूं’ गीत की याद बहुतेरे लोगों को होगी। उसी की तर्ज पर ‘तितली बनूं उड़ती फिरूं’ भी कह सकते हैं। बच्चों के लिए लिखने वाले कवियों की भी कविताएं हैं तितली पर। वह रूपक और प्रतीक भी बनती रही है। और एक छवि, एक बिंब के रूप में भी वह अनुपम है।
from JansattaJansatta https://ift.tt/2wk5Rud
via
No comments:
Post a Comment