नायपॉल पहली बार विश्व साहित्य में चर्चा में आए तो वह भारत के कारण ही। 1961 में उनका चौथा उपन्यास आया था- ‘ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास’। यह औपन्यासिक वृतांत है तो त्रिनिदाद का, पर कहानी का एक आंतरिक सिरा भारत से भी गहरे तौर पर जुड़ा है।
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