आज की व्यस्त जीवन शैली में रिश्ते अपना अर्थ खोते जा रहे हैं। कई लोग अपने ही रिश्तेदारों से तभी मिलेंगे या फोन करेंगे जब उन्हें उनसे कोई काम पड़ जाए। पहले रिश्तेदारों से मिलना या रिश्ते निभाना एक खूबी मानी जाती थी।
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