कोरोना विषाणु के संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऐसे तमाम लोग बुरी तरह बीमार हुए, जिनका इलाज अभी चल रहा है। कई मरीजों के बच्चे आज लाचारी की हालत में पहुंच चुके हैं। इससे भी ज्यादा बुरी दशा उन बच्चों की हुई, जिनके माता-पिता या उनमें कोई एक संक्रमण का शिकार हुए और उनकी मौत हो गई। खासतौर पर ऐसे परिवारों के बच्चों के जीवन के बारे में कल्पना भी तकलीफदेह है, जिनके दूसरे संबंधी नहीं थे या वे उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए।
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