दरअसल, केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री को कई ग्राम प्रधानों से जानकारी मिली थी कि ढेर सारे लोग कोरोना टेस्ट कराने और वैक्सीन लगवाने को लेकर इच्छुक नहीं है, जिनमें कुछ खौफजदा भी हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि टीका लगवाना और टेस्ट कराना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
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