भागवत ने इकबाल की पंक्तियां ‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’ उद्धत की और कहा कि विषाणु छुपा होगा, रूप बदलने वाला होगा, फिर भी हम जीतेंगे। उन्होंने कहा कि मन अगर थक गया, तो दिक्कत होगी। जैसे सांप के सामने चूहा अपने बचाव के लिए कुछ नहीं करता। ऐसा नहीं होने देना है।
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