कहा जाता है कि जब तक शूरवीर महाराणा प्रताप अमर रहेंंगे, तब तक दानवीर भामाशाह भी, क्योंकि उनके ही दान से ही यह सनातन धर्म और शूरवीर महाराणा प्रताप का साम्राज्य सुरक्षित हुआ। इसलिए जब जब शूरवीर महाराणा प्रताप का भाला चर्चा में आएगा, तब तब दानवीर भामाशाह की दानवीरता भी, क्योंकि दोनों एक जैसे ही महान थे और उनके राष्ट्रीय, सामाजिक व धार्मिक अवदान भी उन्हीं की तरह उत्तम कोटि के समझे जाते हैं।
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