जस्टिस मुक्त गुप्ता ने कहा कि यह एक सार्वजनिक स्थल है। जब अन्य जगहों के धार्मिक स्थलों पर ऐसी कोई रोक नहीं है तो फिर वह मस्जिद में आने वाले लोगों की संख्या तय नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि किसी भी धर्म के मामले में श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित करने का कोई जिक्र नहीं है।
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