Tuesday, 9 March 2021

जीवट और जिजीविषा के बूते

इक्कीसवीं सदी के दो दशक गुजर जाने के बाद भी अपने आसपास की स्त्रियों को जिस सामाजिक हैसियत में देखती हूं, वह दुखी जरूर करता है, लेकिन हैरान नहीं करता है।

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