पानी का संकट अब एक इलाके या देश से जुड़ा संकट भर नहीं रहा। हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि कई देशों के बीच होने वाले करारों में आयुध खरीद और वाणिज्यिक सहमतियों के साथ पानी के लेनदेन पर भी बड़े समझौते होने लगे हैं।
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