कोरोना काल में शिक्षण संस्थानों के बंद रहने, बिना परीक्षा के उत्तीर्ण करना, अगली कक्षा में प्रोन्नत करने, शिक्षक-छात्र में संवाद की कमी, आॅनलाइन अध्ययन और अध्यापन, अनुत्तीर्ण का भय नहीं, शिक्षकों की अशैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाने और छात्रों का भी अन्य कार्यों में व्यस्त हो जाने से छात्रों-शिक्षकों की जीवन शैली में भारी बदलाव आया है।
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