Tuesday, 23 February 2021

इंसानियत की धुन

चाहे समय अनुकूल हो या प्रतिकूल, गांधी अपने प्रतिदिन के कार्यों का हिसाब अपनी डायरी में रखते थे और सोने के पहले पलट कर जरूर देखते थे कि उनका वह बीता हुआ दिन कहीं यों ही तो नहीं बीत गया।

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