यह तथ्य है कि पारिस्थितिकी तंत्र में जितने भी जीव-जंतु हैं, उन सबकी उपयोगिता है। पृथ्वी पर उन सबके उतने ही अधिकार हैं, जितने मानव के हैं। लिहाजा हमारी जीवन शैली किसी भी तरह प्रकृति से साहचर्य की होनी चाहिए, न कि भोग की।
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