दंड का विधान यों तो इसलिए किया जाता है कि आपराधिक वृत्तियों पर अंकुश लगाया और सामाजिक समरसता को भंग होने से रोका जा सके। मगर कोई अपने विरोधियों और विपक्षियों को सबक सिखाने के मकसद दंडविधान रचे, तो उस पर अंगुलियां उठनी स्वाभाविक है।
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