सिख धर्म के प्रवर्तक श्री गुरु नानक देव जी के सुपुत्र भगवान श्री चंद्राचार्य महाराज ने उदासीन संप्रदाय की स्थापना की थी और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर तथा गणपत्य मत को मानने वाले सभी धर्माचार्य को संगठित कर पंचदेवोपासना प्रतिपादित किया।
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