सनातन संस्कृति के प्रसार में पवित्र स्थानों ने अति महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। नदियां, पर्वत एवं वन सदैव पुण्यप्रद एवं दिव्य स्थल कहे गए हैं। तीर्थयात्रा से समाज एवं स्वयं तीर्थयात्रियों को बहुत लाभ होते हैं।
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