अपने घरेलू राजनीतिक हितों की वजह से कनाडा के प्रधानमंत्री ने ऐसा बयान देने में कूटनीतिक सीमाओं का भी खयाल नहीं रखा। ट्रूडो ने किसान आंदोलन को लेकर जिस तरह से चिंता जाहिर की, उससे ऐसा संदेश गया जैसे भारत में सरकार किसानों पर भारी अत्याचार कर रही है और सब कुछ अनर्थ होने जा रहा है।
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