Monday, 28 December 2020

संपादकीय: अराजकता की राह

देश के कई हिस्सों में सामाजिक मसलों पर जातीय या खाप पंचायतों के फैसलों के बाद स्थानीय स्तर पर ही किसी व्यक्ति या परिवार के साथ अराजक बर्ताव की खबरें अक्सर आती रहती हैं। निश्चित रूप से ऐसे मामलों में देश की कानून-व्यवस्था को ताक पर रख दिया जाता है और मान लिया जाता है कि न्याय और सजा का यही रास्ता है।

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