दरअसल जब किसी भी तरह की कोई कुंठा हमारे मन में घर कर लेती है तो हमारी मानसिकता भी संकुचित हो जाती है। कुंठित मन न ही तो कुछ अच्छा सोच पाता है और न ही सकारात्मक विचारों के लिए कोई जमीन तैयार कर पाता है।
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