जिस तरह जनता ने अपनी आवश्यकताओं का मूल्यांकन करने की क्षमता खो दी है और आस्था के नाम पर राजनीतिक दलों के हाथों की कठपुतली बनती जा रही है, वह अत्यंत दुखद और भयावह है। भारत महान था और रहेगा, लेकिन इसकी जिम्मेदारी केवल राजनीतिकों की ही नहीं, बल्कि जनता की भी है।
from JansattaJansatta https://ift.tt/3hp6fL6
via
No comments:
Post a Comment