मौजूदा दौर में उर्दू शायरी जिस तरह देश और समाज के हालात और सवालों को लेकर मुखर है, उसकी बड़ी प्रेरणा गालिब हैं। तर्जे सुखन से आगे जिस तरह इंसानी नफसियात को वे गहराई में जाकर समझते थे और बड़ी ही सादगी से अवाम के सामने रख देते थे, उसका लोहा आज भी माना जाता है।
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