आडंबर, अंधविश्वास और आतंक की आड़ में वे लोगों को फुसलाते हैं और अपना वर्चस्व कायम करते हैं। अपनी गलती, कमजोरी और विकृति या हीनभावना छिपाने के लिए ही लोग ये उपक्रम करते हैं। वे चाहते हैं कि समाज उनकी इन्हीं हरकतों पर नजर रखे और असलियत न जान पाए।
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