संसार के बहुत सारे विकसित और विकासशील देश इस बात को समझ गए हैं कि अगर नागरिकों को तथ्यों को समझने की कला नहीं सिखाई जाती, तो सारी शिक्षा अधूरी है। विषय समाज विज्ञान का हो या शुद्ध विज्ञान, इंजीनियरिंग का, विद्यार्थी का ठोस ज्ञान तभी बनेगा, जब उसे तथ्यों का विश्लेषण करने आता हो। नहीं तो वह अधूरी और अधकचरी, अप्रासंगिक चीजों को भी सही मान लेगा।
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