अहमद ने देश के सुदूरवर्ती इलाके में स्थानीय लोगों को पढ़ाने के लिए कई बड़े आॅफर ठुकरा दिए। वे पुंछ जिले के मेंढर के सरकारी डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री पढ़ाते हैं। वह अपने परिवार की पहली पीढ़ी के शिक्षित शख्स हैं। अहमद का कहना है कि वह अपने समुदाय को कुछ वापस देना चाहते हैं। वे कहते हैं, 'मैं अच्छी शिक्षा के लिए संघर्ष के बारे में जानता हूं। जब मेरे पिता का निधन हुआ तब मैं मुश्किल से एक साल का था। मैं केवल स्कॉलरशिप की मदद से ही अपनी पढ़ाई पूरा कर पाने में सक्षम था। मैं राजौरी में पला बढ़ा, जहां सीमित साधन थे।
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