जब समाज और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पण करने की प्रतिबद्धता के साथ राजनीति में विभिन्न चेहरे सक्रिय होंगे, तब आम नागरिकों को विकल्प भी मिलते ही चले जाएंगे। वर्तमान दौर में राजनीति में सक्रिय शख्सियत का पेशेवर अंदाज नागरिकों को कहीं कांटे की तरह चुभता है। लेकिन सशक्त विकल्प के अभाव में आम नागरिकों का मताधिकार रूपी अंतिम अस्त्र भी कुल मिला कर निरर्थक सिद्ध हो जाता है।
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