2015 के चुनाव में वाम दल बिखरे हुए थे और उन्होंने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। जाहिर है, नतीजा किसी वाम दल के हक में नहीं हुआ था। लेकिन इस बार वाम दलों ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। नतीजा फायदे का रहा।
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