अब सवाल यह है कि इन महामारियों का संज्ञान उस समय के साहित्य ने किस तरह लिया? समाज में घटित घटनाओं का संज्ञान लेना साहित्य का दायित्व होता है। साहित्य अपने समय को रेखांकित करता है। वह अपने समय के सवालों से लगातार टकराता है। साहित्य इन सबसे अछूता नहीं रह सकता।
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