खुद से आनंद लेना कोई कलाकार से सीखे, जब वह गाता है या फिर कोई वाद्य बजा रहा होता है तो उसमें पूर्णतया खो जाता है और उस खोने को ही ध्यान की अवस्था से तुलना की जा सकती है, जिसमें पूर्ण आनंद है।
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