घाटी में अमन का रास्ता पहले तो कश्मीर के राजनेताओं को स्वीकार करना होगा कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर कभी वापस नहीं आने वाला है। इसको जब स्वीकार करेंगे तो उनको दिखने लगेगा कि प्रधानमंत्री से वे आसमान भी अगर मांगेंगे तो वे शायद मना नहीं करेंगे। उनकी कश्मीर नीति सफल तभी मानी जाएगी, जब घाटी में शांति इस हद तक फैलेगी कि कश्मीरी पंडितों की घर वापसी हो सके।
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