सवाल शिक्षा से आगे उस सामाजिक रचना का है, जिसमें तर्क से ज्यादा छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच की धारणा पर जोर है। ऐसे में एक विषम स्थिति से निपटने की तैयारी और हिदायतों का कोई मतलब नहीं रह जाता है।
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