हर व्यक्ति कैसे अपने अतीत की यादों को निहारता है, इसका विश्लेषण प्रभावकारी है। बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था को सापेक्ष मानते हुए बचपन की असीम खुशी वाले पल को सौंदर्य के गहने से इस प्रकार चित्रित किया गया है कि ऐसा लगता है कि बचपन ही जीवन का वास्तविक सौंदर्य है।
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