विज्ञापन जगत की बड़ी शख्सियत प्रह्लाद कक्कड़ का कहना है कि एक बात साफ है कि धंधा भले ही अंग्रेजी में हो रहा हो लेकिन ख्वाब हिंदी में बिकते हैं और कारोबार बढ़ाने के लिए ख्वाबों को बेचना पड़ता है।
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