Sunday, 4 October 2020

विशेष: आशा से ज्यादा निराशा का आभास

जुकरबर्ग अपने सहयोगी मित्रों से कहते थे कि मैं आने वाले दिनों में बदलाव के सबसे ऊंचे और तेज लहर की सवारी करूंगा क्योंकि मैं महज लोगों तक पहुंचने में नहीं बल्कि उनके अंदर तक झांकने में सक्षम हूं।

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