Monday, 26 October 2020

चौपाल: सतर्कता ही बचाव

कभी गांवों में त्योहारों की तैयारियां कई सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती थीं और गांव के बच्चे-बूढ़े सभी सौहार्दपूर्ण तरीके से एक दूसरे से मिलते जुलते थे। त्योहार के दिन बच्चे और युवा गांव के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने जरूर जाते थे और यह प्रथा सम्मान और अनुशासन का द्योतक हुआ करती थी।

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