Thursday, 3 September 2020

हमारी याद आएगीः जब देनी पड़ी हिंदी फिल्मों में प्रवेश के लिए परीक्षा

असम की हरीतिमा लिए चाय बागानों में चहचहाते पक्षियों और चलती मंद हवा के साथ मोजार्ट की सिंफनियों की खुराक पर पले थे संगीतकार सलिल चौधरी। आजादी के आंदोलन से जुड़े रहे सलिल चौधरी के गाने बंगाल में खूब गूंजे। उन्होंने बांग्ला और हिंदी समेत दस भाषाओं की फिल्मों में संगीत दिया। मलयालम फिल्म ‘चेम्मीन’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पाया। ‘ऐ मेरे प्यारे वतन...’, ‘मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने...’, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए...’, ‘सुहाना सफर और ये मौसम हंसी...’ जैसे गाने बनाए। किरदारों की भावनाओं को संगीत के जरिए उभारने में ‘मास्टर’ माने गए सलिल चौधरी की कल 25वीं पुण्यतिथि है।

from JansattaJansatta https://ift.tt/2Z73rKN
via

No comments:

Post a Comment