बड़ा सवाल तो यह है कि ये कानून किस दृष्टिकोण से श्रम सुधार कानून हैं ? इन कानूनों में तो सीधे-सीधे 300 मजदूरों की संख्या वाली कंपनियों और पूंजीपतियों को यह अधिकार दे दिया गया है कि वे जब चाहें उन मजदूरों को बगैर कोई कारण बताए निकाल बाहर कर सकते हैं। यह कानून तो बिल्कुल मजदूर विरोधी षड्यंत्र है!
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