इंटरनेट पर आज सब अपने-अपने तरीके की हिंदी ला रहे हैं। इनका अपना साहित्य, समाज, परिवार सब कुछ हिंदी में है। सवाल है कि इसे मुख्यधारा की हिंदी क्यों न मानी जाए। हिंदी के मानकीकरण में सबके साथ समस्या आती है।
from Jansattaराष्ट्रीय – Jansatta https://ift.tt/33vrzrQ
via
No comments:
Post a Comment