Sunday, 9 August 2020

दुनिया मेरे आगे: स्वार्थ का समाज

इसमें कोई दो राय नहीं कि समय के साथ सामाजिक व्यवस्था और परंपराएं भी बदली हैं। ऐसे में लोगों की मानसिकता में भी अगर बदलाव आए तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। यों जब-जब बदलाव होता है, तब लोगों की उम्मीद यह रहती है कि यह अच्छे के लिए हो, बुरे के लिए नहीं। यह अलग बात है कि आमतौर पर होता इसका उल्टा है।

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