दुनिया समझदारों से नहीं, दीवानों की वजह से चल रही है। पहिये के आविष्कार से लेकर आइपैड तक, जाने कितने आविष्कार पहले मस्तिष्क में जन्मे हैं, सपनों में पले हैं, तब सच की धरती पर आ पाए हैं।
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