जिस समाज में बेटे की चाह में बेटियां पैदा की जाती हों, प्रतिकूल लिंग अनुपात हो, प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्याएं होती हों, बेटियां जन्म से ही पराया धन मान कर लैंगिक भेदभाव झेलती हों, वहां बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हक दिलवाने के लिए रूढ़िवादियों से एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
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