फिल्मी दुनिया कलाकारों और तकनीशियनों की प्रतिभा से नहीं बल्कि अपनी जरूरतों के हिसाब से चलती है। यही कारण है कि हीरो बनने आए मुकेश को यह दुनिया गायक बना देती है और गायक बनने आए राज खोसला को निर्देशक। हृषिकेश मुखर्जी, जो विज्ञान और गणित की पढ़ाई करने के बाद न्यू थियेटर्स में प्रयोगशाला सहायक के रूप में काम कर रहे थे, के साथ भी यही हुआ। उन्होंने फिल्मी दुनिया में शुरुआत मेंकैमरामैन, संपादक, पटकथाकार के रूप में काम किया। बाद में यही फिल्मी दुनिया उन्हें एक निर्देशक के रूप में सामने लेकर आई। ‘अनाड़ी’, ‘आनंद’, ‘सत्यकाम’, ‘चुपके चुपके’, ‘गोलमाल’, ‘बाबर्ची’, ‘नमक हराम’ जैसी फिल्में बनाने वाले हृषिदा की कल 14वीं पुण्यतिथि थी।
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